शनिवार, 8 अगस्त 2009

मेरी माँ............................

मेरी माँ............................

नत होकर मादर-ऐ-कुचे से निकला,

मुझे न पता था, कि रुसवा हे जिन्दगी,

मै फ़िर न लोटकर आ पाउँगा,

लेकिन मेरी माँ खड़ी है चौखट पर वही,

मुझे पता होता कि मै फ़िर न आऊंगा,

तो शायद चूम लेता, मै हथेली उनकी,

दो पल प्यार के और देख लेता उनको,

थोड़ा खाने पर थोड़ा घुमने पर और लड़ लेता,

मुझे न पता था, वो यु ही खड़ी रहेगी,

नही तो अन्दर करके जाता उनको,

  1. लेकी मेरी माँ खड़ी है, चौखट पर वही...........................

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